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श्री सत्यनारायण व्रत कथा

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श्री सत्यनारायण व्रत कथा श्री सत्यनारायण व्रत कथा का पूरा सन्दर्भ यह है कि पुरातन काल में शौनकादिऋषि नैमिषारण्य स्थित महर्षि सूत के आश्रम पर पहुंचे। ऋषिगण महर्षि सूत से प्रश्न करते हैं कि लौकिक कष्टमुक्ति, सांसारिक सुख समृद्धि एवं पारलौकिक लक्ष्य की सिद्धि के लिए सरल उपाय क्या है? महर्षि सूत शौनकादिऋषियों को बताते हैं कि ऐसा ही प्रश्न नारद जी ने भगवान विष्णु से किया था। भगवान विष्णु ने नारद जी को बताया कि लौकिक क्लेशमुक्ति, सांसारिक सुखसमृद्धि एवं पारलौकिक लक्ष्य सिद्धि के लिए एक ही राजमार्ग है, वह है सत्यनारायण व्रत। सत्यनारायण का अर्थ है सत्याचरण, सत्याग्रह, सत्यनिष्ठा। संसार में सुखसमृद्धि की प्राप्ति सत्याचरणद्वारा ही संभव है। सत्य ही ईश्वर है। सत्याचरणका अर्थ है ईश्वराराधन, भगवत्पूजा। सत्यनारायण व्रत कथा के पात्र दो कोटि में आते हैं, निष्ठावान सत्यव्रतीएवं स्वार्थबद्धसत्यव्रती। शतानन्द, काष्ठ-विक्रेता भील एवं राजा उल्कामुखनिष्ठावान सत्यव्रतीथे। इन पात्रों ने सत्याचरणएवं सत्यनारायण भगवान की पूजार्चाकरके लौकिक एवं पारलौकिक सुखोंकी प्राप्ति की। शतानन्दअति दीन ब्राह्मण थे।...

अथ कार्तिक महात्म्य

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कार्तिक स्नान  अथ कार्तिक महात्म्य विषय सूची पहला अध्याय दूसरा अध्याय तीसरा अध्याय चौथा अध्याय पांचवां अध्याय छटा अध्याय सातवां अध्याय आठवां अध्याय नवां अध्याय दसवां अध्याय ग्यारहवां अध्याय बारहवां अध्याय तेरहवां अध्याय चौदहवां अध्याय पंद्रहवां अध्याय सोलहवां अध्याय सत्रहवां अध्याय अठारहवां अध्याय उन्नीसवां अध्याय बीसवां अध्याय इक्कीसवां अध्याय बाईसवां अध्याय तेईसवां अध्याय चौबीसवां अध्याय पच्चीसवां अध्याय छब्बीसवां अध्याय सत्ताईसवां अध्याय अट्ठाईसवां अध्याय उन्नतीसवां अध्याय तीसवां अध्याय इक्तीसवां अध्याय बत्तीसवां अध्याय तेतीसवां अध्याय चौतीसवां अध्याय तुलसी विवाह-विधि पैतीसवां अध्याय कुशकुणिड का हवन श्री तुलसी चालीसा तुलसीजी की आरती श्री सालिग्राम की आरती श्री तुलसीजी की आरती श्री यमुनाजी की आरती श्री गंगाजी की आरती श्री त्रिवेणीजी की आरती श्री हनुमानजी की आरती श्री शंकरजी की आरती ओम जय जगदीश हरे श्री विष्णु स्तुति श्री कमलनेत्र स्तोत्र 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 पहला अध्याय नैमिषारण्य तीर्थ में श्री सूतजी महाराज अट्ठासी हजार शौनकादिक ऋषियों से बोले अब मैं आप...