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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति देवताओं का प्रभात काल कहलाता है मकर संक्रान्ति पर्व भारत में समय-समय पर हर पर्व को श्रद्धा, आस्था, हर्षोल्लास एवं उमंग के साथ मनाया जाता है। पर्व एवं त्योहार प्रत्येक राष्ट्र की संस्कृति व सभ्यता को उजागर करते हैं। यहां पर पर्व, त्योहार और उत्सव पृथक-पृथक प्रदेशों में अलग-अलग ढंग से मनाए जाते हैं।  सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर सक्रान्ति कहलाता है। इसी दिन से सूर्य देव उत्तरायण हो जाते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा गया है। इस तरह मकर सक्रान्ति एक प्रकार से देवताओं का प्रभात काल है।  इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है। कहते है कि इस अवसर पर किया गया दान सौ गुणा होकर प्राप्त होता है। मकर सक्रान्ति के दिन घृत-तिल-कम्बल- खिचड़ी दान का विशेष महत्व है। इसका दान करने वाला सम्पूर्ण भोगों को भोगकर मोक्ष को प्राप्त होता है। मकर सक्रान्ति के दिन गंगा स्नान और गंगा तट पर दान की विशेष महिमा है। तीर्थ राज प्रयाग में मकर सक्रान्ति मेला तो सारे विश्व में विख्यात है। इसका वर्...