वृत और उपवास | 01.2 | चैत्र मास के व्रत शुक्ल पक्ष
वृत और उपवास | 01.2 | चैत्र मास के व्रत शुक्ल पक्ष चैत्र मास के व्रत शुक्लपक्ष 🌺🌺🌺🪷🪷 वृत और उपवास 🪷🪷🌺🌺🌺 (१) संवत्सर (अनुसंधानमञ्जूषा) - यह चैत्र शुक्ल प्रतिपदाको पूजित होता है। इसमें मुख्यतया ब्रह्माजीका और उनकी निर्माण की हुई सृष्टिके प्रधान-प्रधान देवी, देवताओं, यक्ष-राक्षस, गन्धर्वो, ऋषि-मुनियों, मनुष्यों, नदियों, पर्वतों, पशु-पक्षियों और कीटाणुओंका ही नहीं-रोगों और उनके उपचारोंतकका पूजन किया जाता है। इससे यह स्वतः सूचित होता है कि संवत्सर सर्वप्रधान, महामान्य¹ है। 1. कालः सृजति भूतानि कालः संहरति प्रजाः । कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः ॥ अनादिरेष भगवान् कालोऽनन्तोऽजरोऽमरः । सर्वगत्वात् स्वतन्त्रत्वात् सर्वात्मत्वान्महेश्वरः ॥ (विष्णुधर्मोत्तर) संवत्सर उसे कहते है जिसमें मासादि भलीभाँति² निवास करते रहें। इसका दूसरा अर्थ है बारह महीनेका 'कालविशेष' । स च संवत्सरः सम्यग् वसन्त्यस्मिन् मासादयः ।(स्मृतिसार) यही श्रुतिका³ वाक्य भी है। द्वादश मासाः संवत्सरः । (श्रुति) जिस प्रकार महीनोंक चान्द्रादि तीन भेद हैं उसी प्रकार संवत्सरके भी सौर, सावन⁴ और...