अनन्त चतुर्दशी व्रत की विधि
अनन्त व्रत की विधि प्रातःकाल नित्यकर्म व स्नान आदि करने के उपरान्त पवित्र मन से भगवान का स्मरण करें। सर्वत्र सुख की कामना से लम्बोदर विध्न विनाशक श्री गणेश जी का ध्यान करें प्रसन्न मन से श्री चतुर्भुज विष्णु भगवान को प्रणाम करें। 'सव्र मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये व्यम्बके गौरि नारायणि नमास्तुते' यह श्लोक पढ़कर माता भगवती की स्तुति करके विद्या बल और वाणी की देवी सरस्वती को नमन करें। सर्वभूतेषु भगवान शंकर और इष्ट अन्य सभी देवी देवताओं की स्तुति करें। इस प्रकार से धूप-दीप करके देवमूर्ति के समक्ष एकान्त में दत्तचित्त से कथा पढ़ें अथवा सुनें- ॥ श्रीः ॥ ॥ अनन्त चतुर्दशी व्रत निर्णय ।। भाद्र शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि ही अनन्त व्रत के लिए उत्तम चतुर्दशी कही गई है। "उदये त्रिमुहूर्ताऽपि ग्राह्माऽनन्वव्रते तिथिः" (कालमाधव) "मुहूर्त्तमपि चेद् भाद्रे पूर्णिमायां चतुर्दशी। सम्पूर्णां तां विदुस्तस्यां पूजयेद्विष्णुभव्ययम्।" (स्कन्दपुराण) उपर्युक्त वचनों के अनुसार यद्यपि अनन्तचतुर्दशी उदयव्यापिनी ही लेनी चाहिए, किन्तु "मध्याह्न भोज्यवेलायां समुत्तीर्य...