01. चैत्र मास के व्रत (कृष्णपक्ष)
01. चैत्र मास के व्रत (कृष्णपक्ष) चैत्र मास के व्रत कृष्णपक्ष आरम्भका निवेदन - प्रत्येक प्रयोजनके सभी व्रत मास', पक्ष और तिथि-वारादिके सहयोगसे सम्पन्न होते हैं। मास चार प्रकारके माने गये हैं। वे सौर, सावन, चान्द्र और नाक्षत्र नामोंसे प्रसिद्ध हैं। उनमें सूर्यसंक्रान्तिके आरम्भसे उसकी समाप्तिपर्यन्तका 'सौर', सूर्योदयसे सूर्योदय-पर्यन्तके एक दिन-जैसे ३० दिनका 'सावन'३, शुक्ल और कृष्णपक्षका 'चान्द्र और अश्विनीके आरम्भसे रेवतीके अन्ततकके चन्द्रभोगका 'नाक्षत्र'५ मास होता है। ये सब प्रयोजनके अनुसार पृथक् पृथक् लिये जाते हैं- यथा विवाहादिमें 'सौर', यज्ञादिमें 'सावन', श्राद्ध आदिमें 'चान्द्र' और नक्षत्रसत्र (नक्षत्र-सम्बन्धी यज्ञ, यथा श्लेषा-मूलादिजन्मशान्ति) में 'नाक्षत्र' लिया जाता है। मास-गणनामें वैशाख आदिकी अपेक्षा सर्वप्रथम चैत्र क्यों लिया गया ? इसका कारण यह है कि सृष्टिके आरम्भ (अथवा ज्योतिर्गणनाके प्रारम्भ) में चन्द्रमा चित्रापर था (और चित्रा २४ चैत्रीको प्रायः १ होती ही है;) इस कारण अन्य महीनोंकी अपेक्षा चैत्र...