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Showing posts from May, 2025

वट सावित्री व्रत 🌸पति की दीर्घायु हेतु श्रद्धा और संकल्प का पर्व

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वट सावित्री व्रत 🌸पति की दीर्घायु हेतु श्रद्धा और संकल्प का पर्व                    वट सावित्री व्रत हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या (अंधकार पक्ष की आखिरी रात) के दिन मनाया जाता है।  बट सावित्री व्रत शुभ मुहूर्त  हिंदू पंचांग के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है इस बार अमावस्या तिथि की शुरुआत 26 मई को दोपहर 12:11 पर होगी और इसका समापन 27 मई को सुबह 8:31 पर होगा उदयातिथि के अनुसार बट सावित्री व्रत इस बार 26 में को रखा जाएगा वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है ब्रह्मा विष्णु महेश और सावित्री वट वृक्ष में रहते हैं वट वृक्ष ने केवल अत्यंत पवित्र होता है बल्कि काफी ज्यादा दीर्घायु भी है लंबी आयु शक्ति धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर इस वृक्ष की पूजा की जाती है 🌳 वट सावित्री व्रत का महत्व: यह व्रत सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा पर आधारित है, जिसमें सावित्री ने अपन...

श्री गंगा स्तोत्र

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॥ श्री गंगा स्तोत्र ॥ श्री गंगा स्तोत्र पुण्यसलिला माता गंगा को समर्पित एक  स्तोत्र है, इसकी रचना आदिगुरु शंकराचार्य जी ने की  थी। यह स्तोत्र सुन्दर पदावलियों से युक्त और बहुत ही  मधुर है। जो भक्तिपूर्वक इसका पाठ करता है उसके सभी प्रकार  के रोग, शोक, पाप, ताप का नाश हो जाता है और वह  सब प्रकार से सुखी हो जाता है। ॥ श्री गंगा स्तोत्र ॥ देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे । शङ्करमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥1॥ अर्थ – हे देवि गंगे ! तुम देवगण की ईश्वरी हो, हे  भगवति ! तुम त्रिभुवन को तारनेवाली, विमल और  तरल तरंगमयी तथा शंकर के मस्तक पर विहार  करनेवाली हो। हे माता ! तुम्हारे चरण कमलों में मेरी  मति लगी रहे। भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा  निगमे ख्यातः । नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥2॥ अर्थ – हे भागीरथि ! तुम सब प्राणियों को सुख देती हो,  हे माता ! वेद और शास्त्र में तुम्हारे जल का माहात्म्य  वर्णित है, मैं तुम्हारी महिमा कुछ नहीं जानता,  हे दयामयि ! मुझ अज्ञानी की ...