तुलसी–विष्णु विवाह विधिः अर्थ सहित
🌷2⃣🌷 तुलसी पूजा (१) 🌷2⃣🌷 श्री तुलसी पूजन विधि (२) 🌷3⃣🌷 श्री तुलसी लघुपूजा (३) 🌷4⃣🌷 श्री तुलसीपूजा (४) 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🌷1⃣🌷 तुलसी पूजा (१) 🌷🌷🌷 🟩🟩🟩 हिन्दी अर्थ सहित 🟩🟩🟩 यह विधि प्रातःकाल या सायंकाल तुलसी-वृन्दावन में की जाती है। शुद्ध मन, स्नान के पश्चात, दीप जलाकर, तुलसी के समीप पूर्वमुख या उत्तरमुख होकर पूजन किया जाता है। ॥ अथ तुलसी पूजा प्रारंभः ॥ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ (पूजन से पूर्व गणेशजी का स्मरण करें) ॥ अथ तुलसीपूजनं लिख्यते ॥ श्रीमहादेव उवाच — (भगवान शिव पार्वतीजी से कहते हैं) शुभे पक्षे शुभे वारे शुभे ऋक्षे शुभोदये । केशवार्थे शुभांशे च रोपयेत्तुलसीं मुनिः ॥ १॥ हिन्दी अर्थ: किसी भी शुभ पक्ष, शुभ वार, शुभ नक्षत्र और शुभ प्रभात में, भगवान केशव (विष्णु) के निमित्त भक्त को तुलसी रोपनी चाहिए। गृहस्थो गृहमध्ये वा गृहस्थोपवनेपि वा । शुचौ देशे तु तुलसीमर्च्चयेद्बुद्धिमान्नरः ॥ २॥ हिन्दी अर्थ: गृहस्थ व्यक्ति चाहे घर के मध्य भाग में या घर के उपवन में, शुद्ध स्थान पर तुलसी का पूजन करे — यही बुद्धिमान का आचरण है। मूले च वेदिकां कृत्व...