मकर संक्रांति
मकर संक्रांति
देवताओं का प्रभात काल कहलाता है मकर संक्रान्ति पर्व
भारत में समय-समय पर हर पर्व को श्रद्धा, आस्था, हर्षोल्लास एवं उमंग के साथ मनाया जाता है। पर्व एवं त्योहार प्रत्येक राष्ट्र की संस्कृति व सभ्यता को उजागर करते हैं। यहां पर पर्व, त्योहार और उत्सव पृथक-पृथक प्रदेशों में अलग-अलग ढंग से मनाए जाते हैं।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर सक्रान्ति कहलाता है। इसी दिन से सूर्य देव उत्तरायण हो जाते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा गया है। इस तरह मकर सक्रान्ति एक प्रकार से देवताओं का प्रभात काल है।
इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है। कहते है कि इस अवसर पर किया गया दान सौ गुणा होकर प्राप्त होता है। मकर सक्रान्ति के दिन घृत-तिल-कम्बल- खिचड़ी दान का विशेष महत्व है। इसका दान करने वाला सम्पूर्ण भोगों को भोगकर मोक्ष को प्राप्त होता है।
मकर सक्रान्ति के दिन गंगा स्नान और गंगा तट पर दान की विशेष महिमा है। तीर्थ राज प्रयाग में मकर सक्रान्ति मेला तो सारे विश्व में विख्यात है। इसका वर्णन करते हुए गोस्वामी तुलसी दास जी ने भी श्री रामचरित मानस में किया है। स्पष्ट है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर तीर्थ राज प्रयाग में मकर सक्क्रान्ति पर्व के दिन सभी देवी-देवता अपना स्वरूप बदल कर स्नान के लिए आते हैं। अतएव वहां मकर सक्रान्ति पर्व के दिन स्नान करना अनन्त पुण्यों को एक साथ प्राप्त करना माना जाता है। मकर सक्रान्ति पर्व पर इलाहाबाद (प्रयागराज) के संगम स्थल पर प्रतिवर्ष लगभग एक मास तक माघ मेला लगता है, जहा भक्तगण कल्पवास भी करते हैं। बारह वर्ष में एक बार कुम्भ मेला लगता है यह भी लगभग एक माह तक रहता है। श्राद्ध
इसी प्रकार छह वर्षों में अर्ध कुम्भ मेला भी लगता है। मकर सक्रान्ति पर्व प्रायः प्रतिवर्ष 14 जनवरी को पड़ता है। उत्तर भारत में गंगा-यमुना के किनारे बसे गांवों, नगरों में मेलों का आयोजन होता है। भारत वर्ष का सबसे प्रसिद्ध मेला बंगाल में मकर सक्क्रान्ति पर्व पर गंगा सागर में लगता है। गंगा सागर के मेले के पीछे पौराणिक कथा है कि आज के दिन गंगा जी स्वर्ग से उतरकर भागीरथ के पीछे-पीछे चल कर कपिल मुनि के आश्रम में जाकर सागर में मिल गई। इसके अतिरिक्त दक्षिण बिहार के मदार क्षेत्र में भी एक मेला लगता है। पंजाब, जम्मू-कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश में लोहड़ी के नाम से मकर सक्रान्ति पर्व मनाया जाता है। दक्षिण भारत में मकर सक्रान्ति को पोगल के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष रविवार 14 जनवरी को मकर संक्रान्ति सारे देश में श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी।
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