श्रीगर्भरक्षाम्बिका/ गर्भचण्डिका स्तोत्रम्

श्रीगर्भरक्षाम्बिका/ गर्भचण्डिका स्तोत्रम्
सबसे प्रामाणिक रूप में “गर्भ चण्डिका” के नाम से जो स्तोत्र प्रसिद्ध है,वह वास्तव में “श्री गर्भ-रक्षाम्बिका स्तोत्र” ही है —यह स्तोत्र गर्भसुरक्षा हेतु परम्परागत रूप से पाठित होता है और नित्यपाठ के लिए शुद्ध एवं सम्पूर्ण माना गया है।
🕉️ श्री गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र
वापीतटे वामभागे वामदेवस्य देवी स्थिता वन्द्यमाना।
मान्या वरेण्या वदन्या पाहि गर्भस्थजन्तून् तथा भक्तलोकान्॥

श्रीगर्भरक्षापुरे या दिव्यसौन्दर्ययुक्ता सुमङ्गल्यगात्री।
धात्री जनीत्री जनानां दिव्यरूपां दयार्द्रां मनोज्ञां भजे त्वाम्॥

आषाढमासे सुपुण्ये शुक्रवारे सुगन्धेन गन्धेन लिप्ताम्।
दिव्याम्बराकल्पवेषां वाजपेयादियज्ञेषु भक्त्या सुदृष्टाम्॥

कल्याणधात्रीं नमस्ये वेदिकां च स्त्रियो गर्भरक्षाकरीं त्वाम्।
बालैः सदा सेविताङ्घ्रिं गर्भरक्षार्थमारादुपैतु प्रपीठम्॥

ब्रह्मोत्सवे विप्रवेद्यां वाद्यघोषेण तुष्टां रथे सन्निविष्टाम्।
सर्वार्थदात्रीं भजेहं देववृन्दैरपीऽड्यां जगन्मातरं त्वाम्॥

एतत्कृतं स्तोत्ररत्नं गर्भरक्षार्थमातृप्तबालाम्बिकायाः।
नित्यं पठेद्यस्तु भक्त्या पुत्रपौत्रादिभाग्यं भवेत्तस्य नित्यम्॥

श्रीदेविमातर्नमस्ते॥ 
🌹 कई परम्पराओं में प्रत्येक श्लोक के बाद
“श्री माधवी-काननस्ये गर्भ-रक्षाम्बिके पाहि भक्तं स्तुवन्तम्” जैसा पुनरावर्तन भी दुहराया जाता है — यह भी उसी स्तोत्र की एक पद्धति-भेद परंपरा है।

---🌿 पाठ-विन्यास और संकल्प-विधि 🌿
    संक्षिप्त विनियोग:- “मम गर्भरक्षा-सिद्ध्यर्थं श्री गर्भ-रक्षाम्बिका-स्तुति-पाठं करिष्ये”
ऐसा संकल्प कर आसन पर बैठकर पाठ आरम्भ करें।

हृदय-विन्यास:
देवी का ध्यान कर दाहिने हाथ से हृदय देश को स्पर्श करते हुए “देव्यै नमः” का आन्तरिक भाव रखें और फिर स्तोत्र-पाठ प्रारम्भ करें।

इस स्तोत्र के लिए पृथक ऋष्यादि-न्यास अनिवार्य नहीं माना गया है। शुद्ध भक्ति और श्रद्धा के साथ किया गया पाठ ही परम्परा में पूर्ण माना गया है।

--🍁गर्भरक्षा मन्त्र :- “ॐ गर्भरक्षाम्बिकायै च विद्महे मङ्गल-देवतायै च धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्॥”

---🪷 क्या यही गर्भचण्डिका है ? उत्तर - हाँ — व्यवहार में “गर्भचण्डिका” नाम से जो स्तोत्र माँगा या पाठ किया जाता है।वही तिरुवरूर क्षेत्र की परम्परा से प्रसिद्ध श्री गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्र है।
यदि किसी स्थान पर “माला/न्यास सहित गर्भ चण्डिका” का स्थानीय रूप मिलता है, तो वह मात्र पद्धति-भेद है।

🍁माँ गर्भरक्षाम्बिका आपकी गर्भसुरक्षा करें, सुख, सौभाग्य और सन्तान-सौख्य प्रदान करें। 🍁

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